New GST Rates:महंगाई के इस दौर में आम जनता के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। जनवरी 2026 में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के इस फैसले से करोड़ों परिवारों को सीधा फायदा मिला है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में ईंधन पर निर्भर रहते हैं।
महंगाई के बीच क्यों अहम है यह राहत
आज हर चीज महंगी होती जा रही है। सब्जी, दाल, अनाज और अन्य जरूरी सामान की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में अगर पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ते, तो इसका असर सीधे ट्रांसपोर्ट और रसोई के खर्च पर पड़ता।
ईंधन के दाम स्थिर रहने से बस, ट्रक और टैक्सी का किराया नहीं बढ़ेगा। इससे दूध, सब्जी और जरूरी सामान की कीमतें भी कंट्रोल में रहेंगी। घरेलू बजट संभालने में यह स्थिरता बहुत मददगार साबित हो रही है।
पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के ताजा रेट
जनवरी 2026 में देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94 रुपये 72 पैसे प्रति लीटर बनी हुई है। वहीं डीजल 87 रुपये 62 पैसे प्रति लीटर पर स्थिर है।
घरेलू उपयोग में आने वाला 14.2 किलो का एलपीजी गैस सिलेंडर 803 रुपये में मिल रहा है। ये कीमतें पिछले कई महीनों से नहीं बदली हैं, जिससे लोगों को राहत मिली हुई है।
कीमतें स्थिर रहने का असली मतलब
ईंधन की कीमतें स्थिर रहने का मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति में बदलाव के बावजूद सरकार ने घरेलू स्तर पर कीमतों को नियंत्रित रखा है।
हर महीने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां कीमतों की समीक्षा करती हैं। इस बार कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, जो आम आदमी के लिए राहत की बात है।
सरकारी योजनाएं और सब्सिडी की भूमिका
ईंधन की कीमतें स्थिर रखने में सरकार की योजनाओं की अहम भूमिका है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को गैस सिलेंडर पर सब्सिडी मिल रही है।
उज्ज्वला योजना 2.0 के जरिए करोड़ों नए गैस कनेक्शन दिए गए हैं। सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे गैस सिलेंडर सस्ता पड़ता है।
पेट्रोल और डीजल पर पहले की गई एक्साइज ड्यूटी में कटौती का फायदा भी अभी तक जनता को मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर और घरेलू संतुलन
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। वैश्विक तनाव के कारण इनमें तेजी आने की संभावना रहती है, लेकिन सरकार टैक्स और ड्यूटी के जरिए संतुलन बनाए हुए है।
ग्रामीण इलाकों में डीजल खेती और सिंचाई के लिए जरूरी है। कीमतें न बढ़ने से किसानों को राहत मिली है। वहीं शहरों में पेट्रोल सस्ता रहने से रोज ऑफिस जाने वाले लोगों का खर्च बच रहा है।
भविष्य की तैयारी और सरकार के कदम
सरकार ईंधन की लागत कम करने के लिए कई कदम उठा रही है। बायोडीजल और इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो।
इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल पर खर्च कम हो सकता है।
जनवरी 2026 में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कीमतों का स्थिर रहना आम जनता के लिए बड़ी राहत है। सरकार की नीतियों और योजनाओं से महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण बना हुआ है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भी यह राहत बनी रहेगी और आम आदमी का बजट संतुलित रहेगा









