Land Registry New Rule 2026:भारत सरकार ने जनवरी 2026 से जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया में बड़े बदलाव लागू किए हैं। ये नियम डिजिटल इंडिया मिशन के तहत लाए गए हैं, जिनका उद्देश्य संपत्ति रजिस्ट्री को तेज, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। नए नियमों के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई है और आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
पुरानी रजिस्ट्री व्यवस्था की समस्याएं
पहले जमीन या मकान की रजिस्ट्री कराना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया थी। लोगों को कई दिनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कागजी काम ज्यादा होने के कारण देरी, भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों की समस्या आम थी। कई मामलों में रजिस्ट्री पूरी होने में हफ्तों या महीनों लग जाते थे। इन्हीं समस्याओं को खत्म करने के लिए सरकार ने नई डिजिटल व्यवस्था लागू की है।
डिजिटल रजिस्ट्री से मिला आसान समाधान
नई व्यवस्था में ज्यादातर काम ऑनलाइन कर दिया गया है। अब खरीदार और विक्रेता घर बैठे ही रजिस्ट्री से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल सिस्टम से जमीन से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी।
आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य
नए नियमों के तहत आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। रजिस्ट्री के दौरान बायोमेट्रिक जांच के जरिए फिंगरप्रिंट और फेस रिकग्निशन से पहचान की पुष्टि की जाएगी। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी जरूरी होगी। इससे किसी दूसरे के नाम पर या नकली दस्तावेजों के जरिए रजिस्ट्री कराने की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।
स्टांप ड्यूटी और फीस का ऑनलाइन भुगतान
अब स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान भी पूरी तरह ऑनलाइन किया जा सकता है। लोग UPI, नेट बैंकिंग या अन्य डिजिटल माध्यमों से आसानी से भुगतान कर सकेंगे। नकद लेनदेन को हतोत्साहित किया गया है, जिससे काले धन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
रजिस्ट्री के लिए जरूरी दस्तावेज
नई प्रक्रिया में कुछ जरूरी दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, संपत्ति के पुराने मालिकाना दस्तावेज, पते का प्रमाण (बिजली या पानी का बिल) और सर्किल रेट या प्रॉपर्टी वैल्यूएशन सर्टिफिकेट शामिल हैं। सभी दस्तावेजों को स्कैन कर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना होगा। किसी भी दस्तावेज की कमी होने पर आवेदन रद्द किया जा सकता है।
नई रजिस्ट्री प्रक्रिया कैसे पूरी होगी
सबसे पहले अपने राज्य के लैंड रजिस्ट्री पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद आधार लिंकिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए खरीदार, विक्रेता और गवाहों की पहचान की पुष्टि की जाएगी। सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर डिजिटल रजिस्ट्री सर्टिफिकेट ईमेल पर भेज दिया जाएगा।
खरीदार और विक्रेताओं को क्या फायदे
नई व्यवस्था से फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। संपत्ति का मालिकाना हक स्पष्ट रहेगा और भविष्य में विवाद की संभावना कम होगी। खरीदारों को सुरक्षा मिलेगी और विक्रेताओं को बिचौलियों से छुटकारा मिलेगा। रजिस्ट्री जल्दी पूरी होने से संपत्ति की खरीद-बिक्री भी तेज होगी।
संभावित चुनौतियां और समाधान
ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमी एक चुनौती हो सकती है, लेकिन इसके लिए कॉमन सर्विस सेंटर और मोबाइल वैन की व्यवस्था की गई है। सरकार ट्यूटोरियल वीडियो और हेल्पलाइन के जरिए लोगों को डिजिटल प्रक्रिया समझा रही है। आने वाले समय में पूरे देश में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी।
जमीन और मकान की रजिस्ट्री के नए नियम आम नागरिकों के लिए बेहद फायदेमंद हैं। इससे समय की बचत, पारदर्शिता और सुरक्षा तीनों सुनिश्चित होंगी। लोगों को सलाह दी जाती है कि रजिस्ट्री कराने से पहले अपने राज्य के आधिकारिक पोर्टल से जानकारी जरूर जांच लें और नई डिजिटल प्रक्रिया का पूरा लाभ उठाएं।
डिस्क्लेमर:
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। नियम और प्रक्रियाएं राज्य के अनुसार अलग हो सकती हैं। रजिस्ट्री कराने से पहले संबंधित राज्य की आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय से पुष्टि अवश्य करें।









