Mustard Bhav Today:देश की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में इन दिनों सरसों के भाव को लेकर हलचल तेज है। जनवरी के तीसरे सप्ताह में कई मंडियों में सरसों के दामों में 25 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़त देखने को मिली है। हालांकि कुछ जगहों पर हल्की गिरावट भी दर्ज की गई है। राजस्थान और हरियाणा की मंडियों में आवक कम होने के कारण भावों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कटाई का समय नजदीक होने से किसान और व्यापारी दोनों बाजार पर नजर बनाए हुए हैं।
सरसों बाजार की मौजूदा स्थिति
फिलहाल सरसों बाजार में न तो बड़ी तेजी है और न ही तेज मंदी। कमजोर मांग और व्यापारियों द्वारा सीमित खरीद के चलते भाव एक दायरे में घूम रहे हैं। मंडियों की तुलना में प्लांटों में सरसों के भाव थोड़े मजबूत बने हुए हैं। इससे साफ है कि बाजार नई फसल की आवक का इंतजार कर रहा है। किसान रोजाना मंडी भाव देखकर अपनी बिक्री की रणनीति तय कर रहे हैं।
राजस्थान की मंडियों में सरसों भाव
राजस्थान की मंडियों में भावों में मिला-जुला रुख देखने को मिला है।
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जयपुर मंडी में सरसों 7250 से 7275 रुपये प्रति क्विंटल रही।
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भरतपुर मंडी में 20 रुपये की गिरावट के साथ भाव 6730 रुपये दर्ज किए गए।
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गंगापुर मंडी में 6801 रुपये,
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अलवर में 6800 रुपये और
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खैरथल मंडी में 6765 रुपये प्रति क्विंटल भाव बोले गए।
इन मंडियों में भावों का अंतर गुणवत्ता और आवक पर निर्भर करता है।
हरियाणा मंडियों का हाल
हरियाणा की मंडियों में भी भाव स्थिर से लेकर हल्की तेजी के साथ रहे।
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हिसार मंडी में सरसों 6400 से 6500 रुपये प्रति क्विंटल रही।
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बरवाला मंडी में भाव 6700 रुपये दर्ज किए गए।
हालांकि आवक सीमित है, लेकिन व्यापारी फिलहाल सोच-समझकर ही खरीद कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश में सरसों के रेट
मध्य प्रदेश की मंडियों में सरसों के भाव पर दबाव देखने को मिला।
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मुरैना मंडी में 42% कंडीशन वाली सरसों 100 रुपये टूटकर 6700 रुपये पर आ गई।
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पोरसा मंडी में भाव 6575 रुपये रहे।
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ग्वालियर मंडी में 6800 रुपये और
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अशोक नगर में 6000 से 6500 रुपये प्रति क्विंटल भाव दर्ज किए गए।
यह गिरावट कमजोर मांग और आगे नई फसल की आवक की संभावना के कारण देखी गई।
प्लांटों में सरसों के भाव क्यों हैं मजबूत
मंडियों के मुकाबले सरसों के प्लांटों में भाव करीब 100 से 110 रुपये प्रति क्विंटल तक ज्यादा बताए जा रहे हैं। तेल मिलें अच्छी गुणवत्ता वाली सरसों की सीमित खरीद कर रही हैं। हालांकि मिलर्स भी नई फसल आने की आशंका को देखते हुए ज्यादा स्टॉक नहीं बना रहे हैं।
नई फसल और कटाई का असर
जनवरी के अंत से सरसों की कटाई शुरू होने की संभावना है और फरवरी के मध्य तक अधिकांश क्षेत्रों में कटाई पूरी हो जाती है। कटाई शुरू होते ही मंडियों में आवक बढ़ेगी, जिससे भावों पर दबाव आ सकता है। इस साल सरसों की बुवाई ज्यादा हुई है, इसलिए उत्पादन अच्छा रहने का अनुमान है।
शादी सीजन और सरसों तेल की मांग
आने वाले समय में विवाह सीजन शुरू होने से सरसों तेल की मांग बढ़ सकती है। होटल, कैटरिंग और घरेलू खपत बढ़ने से तेल मिलों की खरीद में थोड़ी तेजी आ सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नई फसल की भारी आवक के सामने यह मांग ज्यादा बड़ा असर नहीं डालेगी।
कुल मिलाकर सरसों बाजार फिलहाल संतुलन की स्थिति में है। भावों में हल्की तेजी जरूर है, लेकिन बड़ी उछाल की उम्मीद कम है। किसानों को सलाह है कि वे जल्दबाजी में पूरी फसल न बेचें और भाव देखकर चरणबद्ध बिक्री करें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी बाजार सूत्रों पर आधारित है। सरसों के भाव स्थान, समय और गुणवत्ता के अनुसार बदल सकते हैं। किसी भी व्यापारिक निर्णय से पहले नजदीकी मंडी से भाव की पुष्टि अवश्य करें।









