Petrol Diesel LPG:देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी गैस की कीमतें आम जनता के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं। ऑफिस जाना, बच्चों को स्कूल छोड़ना, सामान की ढुलाई या घर की रसोई—हर जगह ईंधन की अहम भूमिका है। साल 2026 की शुरुआत में जब लोग अपने खर्चों की योजना बनाते हैं, तब ईंधन के दाम जानना जरूरी हो जाता है। जनवरी 2026 के मध्य तक कीमतें भले ही ऊंची हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि फिलहाल इनमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जिससे लोगों को कुछ स्थिरता मिली है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं
भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम हर दिन सुबह अपडेट किए जाते हैं। इनके निर्धारण में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों का वैट शामिल होता है। इसके अलावा परिवहन लागत, भंडारण खर्च और डीलर कमीशन भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। इसी कारण एक ही दिन में अलग-अलग शहरों में दाम अलग नजर आते हैं।बड़े शहरों में पेट्रोल के मौजूदा दाम
जनवरी 2026 के मध्य तक प्रमुख महानगरों में पेट्रोल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास है, जबकि मुंबई में यह करीब 103 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में पेट्रोल 103 से 107 रुपये प्रति लीटर के बीच मिल रहा है। इन दामों का असर खासकर रोज लंबी दूरी तय करने वाले कर्मचारियों और छोटे कारोबारियों पर पड़ता है।
डीजल के दाम और उसका असर
डीजल सिर्फ निजी वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परिवहन तंत्र की रीढ़ माना जाता है। ट्रक, बसें, ट्रैक्टर और कृषि मशीनें डीजल पर निर्भर हैं। अधिकतर शहरों में डीजल 90 से 95 रुपये प्रति लीटर के बीच बना हुआ है। डीजल महंगा होने पर माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है, जिसका असर सब्जी, फल, दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।
घरेलू एलपीजी गैस की स्थिति
घरेलू रसोई के लिए एलपीजी गैस सबसे जरूरी ईंधन है। राहत की बात यह है कि जनवरी 2026 में घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। कई शहरों में 14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर लगभग 830 से 850 रुपये के बीच मिल रहा है। राज्यों के टैक्स और डिलीवरी चार्ज के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर जरूर हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर गैस के दाम फिलहाल स्थिर हैं।
राज्यों में कीमतों का अंतर क्यों होता है
ईंधन की कीमतों में अंतर का सबसे बड़ा कारण राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट है। केंद्र सरकार की टैक्स नीति पूरे देश में समान होती है, लेकिन राज्य अपने बजट और जरूरतों के अनुसार टैक्स तय करते हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें अलग दिखाई देती हैं।
उपभोक्ताओं के लिए क्या करें
हालांकि ईंधन के दाम अभी भी ज्यादा हैं, लेकिन फिलहाल स्थिर रहने से लोगों को बजट बनाने में आसानी मिली है। खर्च कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, कार पूलिंग और ईंधन बचाने वाली ड्राइविंग आदतें अपनाई जा सकती हैं। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार और सरकारी नीतियों के अनुसार दामों में बदलाव संभव है, इसलिए समय-समय पर ताजा जानकारी लेते रहना जरूरी है।
जनवरी 2026 में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी गैस के दाम स्थिर रहना आम लोगों के लिए एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण राहत है। अगर यही स्थिरता आगे भी बनी रहती है, तो महंगाई के दबाव में कुछ कमी आ सकती है। उपभोक्ताओं को सलाह है कि वे आधिकारिक स्रोतों से दाम जांचते रहें और ईंधन का समझदारी से उपयोग करें।









